Korba news : कोरबा जिले में शिक्षक का 17 साल पुराना फर्जीवाड़ा उजागर: 12वीं मार्कशीट में हेराफेरी कर हेडमास्टर बना

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कोरबा ब्रेकिंग: शिक्षक ने 12 अंक जोड़े, 17 साल हेडमास्टर बना; DEO ने आरोप पत्र थमाया!

Korba news : कोरबा जिले में शिक्षक का 17 साल पुराना फर्जीवाड़ा उजागर: 12वीं मार्कशीट में हेराफेरी कर हेडमास्टर बना

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न्यूज रुटीन @ कोरबा जिले में शिक्षक का 17 साल पुराना फर्जीवाड़ा उजागर: 12वीं मार्कशीट में हेराफेरी कर हेडमास्टर बना
कोरबा जिले के शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां डिलाडेरा स्कूल के प्रधान पाठक दिलीप कुर्रे ने अपनी 12वीं कक्षा की मार्कशीट में अंकों की हेराफेरी कर 17 वर्षों तक सरकारी नौकरी हथियाई। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की जांच में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।

फर्जीवाड़े का पूरा खुलासा

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दिलीप कुर्रे ने नियुक्ति के समय अपनी मूल 12वीं मार्कशीट में 254 अंकों को बढ़ाकर 266 अंक दिखाए थे। इस छेड़छाड़ से वे शैक्षणिक योग्यता के मानदंड पूरे करने में सफल रहे और पदोन्नति पाकर हेडमास्टर बन गए। सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) और मूल दस्तावेजों की तुलना में यह अंतर साफ नजर आया। DEO ने तत्काल आरोप पत्र जारी कर दिया है, जिसमें शिक्षक पर जालसाजी और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यह मामला करीब 17 साल पुराना है, जब कुर्रे ने फर्जी प्रमाण-पत्र के दम पर सरकारी स्कूल में प्रवेश पाया। इतने लंबे समय तक सिस्टम की नजरों से यह छिपा रहा, जिस दौरान उन्होंने नियमित वेतन, भत्ते और पदोन्नति का लाभ उठाया। अनुमानित रूप से लाखों रुपये का सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है।
विभागीय कार्रवाई और अगले कदम

DEO ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है। विभागीय जांच समिति गठित कर दी गई है, जिसमें शिक्षक की बर्खास्तगी, वेतन वसूली और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
कोरबा कलेक्टर कार्यालय से भी निर्देश जारी हो चुके हैं कि समान फर्जीवाड़ों की जांच statewide की जाए।
सिस्टम पर सवाल और क्षेत्रीय प्रभाव

यह घटना शिक्षा विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय अभिभावक और शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि सभी कर्मचारियों के प्रमाण-पत्रों की डिजिटल जांच अनिवार्य हो।
कोरबा, छत्तीसगढ़ के इस ग्रामीण इलाके में चर्चा जोरों पर है, जहां पहले भी प्रशासनिक लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि Aadhaar-लिंक्ड वेरिफिकेशन सिस्टम से भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं।
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