Korba news : कोरबा का घोटाला? जनदर्शन फाइल खुली तो सामने आया अवैध निर्माण और प्रशासनिक उदासीनता

संक्षेप

DM का आदेश फेल? कोरबा में जनदर्शन फाइल से खुला प्रशासनिक घोटाला

Korba news : कोरबा का घोटाला? जनदर्शन फाइल खुली तो सामने आया अवैध निर्माण और प्रशासनिक उदासीनता

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न्यूज रुटीन @ छत्तीसगढ़ / कोरबा  कोरबा के आरामशीन मुख्य मार्ग पर सरकारी जमीन को निगलने और 22 लाख रुपए की अवैध डील के मामले में एक नया और चौंकाने वाला प्रशासनिक खेल सामने आया है। कलेक्टर की चौखट जनदर्शन में शिकायत के बाद फाइलों की रेंगती चाल ने सरकारी जमीन पर निर्माण करने वालो  के हौसलों को पंख दे दिए हैं। ताजा अपडेट के मुताबिक, कलेक्टर साहब ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार कोरबा को जांच के लिए निर्देशित तो कर दिया है, लेकिन मजाल है कि जमीनी स्तर पर ईंट रखना भी बंद हुआ हो,प्रशासन की कछुआ चाल का पूरा फायदा उठाते हुए अवैध निर्माणकर्ता दिन-रात एक करके कमर्शियल कम्पलेक्स के निर्माण में जुटा है।

कोरबा DM के आदेश के बाद कागजों में  अपूर्ण जांच, मौके पर पूर्ण होता अवैध निर्माण
शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार साहू द्वारा साझा किए गए शासकीय पोर्टल के स्क्रीनशॉट ने इस पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। 

 कार्रवाई में देरी या जानबूझकर ढील दी जा रही है,नियम कहते हैं कि पट्टा निरस्तीकरण और अवैध निर्माण की शिकायत पर तत्काल स्टे काम रोको  का नोटिस जारी होना चाहिए। लेकिन यहाँ तहसीलदार कार्यालय की सुस्ती अवैध निर्माण करने वालों के लिए वरदान साबित हो रही है। जब तक साहब की जांच पूर्ण होगी, तब तक सरकारी जमीन पर निर्माण तैयार हो चुकी होगी, यदि ऐसा होता है तो प्रशासनिक सुस्ती का लेखा-जोखा और कर्तव्य आचरण के प्रति लापरवाही का यह भी एक उदाहरण होगा l

कोरबा कलेक्टर ने एक्शन लेते हुए मामले की जांच हेतु तत्काल तहसीलदार कोरबा को प्रेषित किया गया। लेकर पत्र मिलने के बाद भी तहसीलदार मौके पर काम रुकवाने में नाकाम रहे इसका प्रमाण ऑनलाइन पोर्टल में शिकायत स्टेटस की अपूर्ण जानकारी के साथ-साथ मुख्य मार्ग आरामशीन के सरकारी जमीन मे मौके पर चल रहे अवैध निर्माण है l

 कानपुर बिरयानी के संचालक द्वारा 1925 वर्ग फीट सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी। 

निगम की भूमिका पर भी एक नजर बिना NOC के मुख्य मार्ग पर हो रहे निर्माण को देखकर भी नगर निगम का उड़नदस्ता अनजान बना बैठा है। 

 सवाल तो लाजमी है? क्या तहसीलदार कार्यालय में इस फाइल को जानबूझकर दबाया गया है ताकि निर्माणकर्ता को अपना काम पूरा करने का पर्याप्त समय मिल सके? आखिर इस अपूर्ण स्टेटस के पीछे की असली कहानी क्या है?

सुशासन को सीधा चैलेंज

 DM साहब पत्र लिखते रहेंगे, हम कॉम्प्लेक्स तानते रहेंगे'
यह मामला अब सिर्फ एक अवैध निर्माण का नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर कोरबा जिला प्रशासन की साख की लड़ाई बन चुका है। वर्ष 2002-03 में रकबीर पिता महेंद्र सिंह  द्वारा 240 वर्ग फीट का अस्थायी पट्टा फर्जी तरीके से लिया गया, जिसे 24 साल बाद अब्दुल नसीम मसूरी  को 22 लाख में बेच दिया गया।

इस मामले मे सबसे बड़ा विरोधाभास देखिए एक तरफ कलेक्टर जनदर्शन में शिकायतकर्ता न्याय की उम्मीद में खड़ा है,दूसरी तरफ ऑनलाइन पोर्टल पर अपूर्ण का ठप्पा लगा हुआ है, और तीसरी तरफ आरामशीन मार्ग पर नियमों की धज्जियां उड़ाती हुई अवैध निर्माण खड़ी हो रही है।

सवाल यह है जब मामला जिले के सबसे बड़े अधिकारी कलेक्टर के संज्ञान में आ चुका है,तो मातहत अधिकारी तहसीलदार और नगर निगम अमला इतनी ढील कैसे दे सकते हैं? क्या कोरबा में अवैध निर्माण का सिंडिकेट इतना मजबूत हो चुका है कि वह राजस्व विभाग के आदेशों को भी ठेंगे पर रखता है?अब देखना यह होगा कि क्या DM के नाक के नीचे हो रहे इस मज़ाक पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए तहसीलदार तत्काल कार्रवाई करते हुए निर्माण को ध्वस्त कराते हैं, या फिर यह मामला भी अपूर्ण फाइलों के अंबार में हमेशा के लिए दफन हो जाएगा? l
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